Monday, 3 October 2016

दहशरा दिल्ली की लीला श्रीसीताराम की (03/10/2016)



रोहिणी में आयोजित रामलीला के एक मंडप में श्रीसीताराम की झांकी
रामलीला के दौरान राधेश्याम की रासलीला

पीतमपुरा का रामलीला मंडप जहाँ नाटक "सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र" नाटक का मंचन इस रामलीला में हो रहा है
एक अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारम्भ हो गए शरद ऋतू में दुर्गापूजा यानि दशहरा हमें यह भान कराता है कि खरीफ फसल की बुवाई हो गयी है और जब तक फसल पके और कटने को तैयार हो, हम शरद ऋतू का आनंद उठाये और माँ दुर्गा का स्वागत करें शरद ऋतू का आगमन इस बात का भी परिचायक है कि सर्दी आने ही वाली है, यह और बात है कि इस वर्ष नवरात्र में भी लोग उमस और गर्मी से परेशान हैं हाँ यह अवश्य है कि दिल्ली में रामलीला की धूम अधिक रहती है हर क्षेत्र में रामलीला कमेटियों द्वारा रामलीला का मंचन किया जाता है कहीं कहीं राधे-श्याम के रासलीला का भी समां बंधा है रोहिणी से ऑफिस के लिए चलता हूँ तो पीतमपुरा होते हुए करोलबाग तक पचीस किलोमीटर के दरम्यान ही कम से कम एक दर्जन स्थानों पर रामलीला का मंचन हो रहा है, जहाँ लगे मेले में लोग झूले और खाने पीने के स्टालों पर नवरात्र का मजा लेते देखे जा सकते हैं भीड़ का आलम ही अलग हैहर जगह लोगों की रेलमपेल पूर्व भारत में रहते हुए रामलीला का आनंद नहीं उठा पाया था कभी हाँ, अयोध्या में अनवरत रामलीला देखने का सौभाग्य अवश्य प्राप्त हुआ हैअतः इस वर्ष घूम-घूम कर दिल्ली की रामलीला का आनंद उठा रहा हूँ रामलीला के साथ-साथ अन्य भक्तिपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन भी खूब होता है पीतमपुरा में "सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र” नाटक का मंचन हो रहा है कभी कभी यह सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि आज के दौर में रामलीला और "सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र" जैसे मंचन के क्या औचित्य रह गए हैं? आम जनमानस जहाँ रामराज्य की परिकल्पना आज भी करता है वहां क्या हमारा शासक वर्ग श्रीराम द्वारा स्थापित मापदंडों पर खरे उतरते हैं? इन बातों पर थोड़ा विचार करें और यह भी विचारें कि काश यदि वे ऐसा कर पाते तो आज अपनी दिल्ली विभिन्न रोगों से यों न त्रस्त होती और आमजन यों परेशान नहीं होता आमजन इन त्योहारों का मजा तब और भी उठा पाता श्रीराम राजा हरिश्चन्द्र के ही वंशज हैं इन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहते हैं श्रीराम ने राजा होते हुए भी सामान्य मर्यादाओं का पालन किया जब कि आज के दौर में आम आदमी भी राजा बन कर अपने कर्तव्यों को भूल जाता है और ख़ास बनने की कोशिश करता है अपने देश के शासन तंत्र की यह बड़ी कमजोरी है इस तथ्य से आज दिल्ली का हर एक आम आदमी वाकिफ है और मैं समझता हूँ मुझे इसे और स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है बहरहाल यह खिच-खिच तो लगी ही रहती है इसमें पड़ कर त्यौहार के आनंद को खराब न करें और इन्हें नज़रअंदाज़ करते हुए आइये रामलीला का आनंद उठाएं और श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने की कोशिश करें

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