Friday, 10 August 2018

बाग़बाँ ने आग दी जब आशियाने को मीरे जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे


उत्तर में अवस्थित कश्मीर हिंदुस्तान के सिर का ताज है भारतमाता के पारम्परिक चित्रों में भारतमाता का ताज देश के ताज के साथ-साथ समाहित हुआ दिखता है सिर के इस ताज के बिना देश की कल्पना भी नहीं की जा सकती एक वो भी समय था जब सम्राट मुक्तापीड़ ललितादित्य "दिग्विजय" के नेतृत्व में कश्मीर ने न केवल समस्त हिंदुस्तान की रक्षा उत्तर-पश्चिम के आक्रमणकारियों से की थी वरन बदक्शॉ, काबुल, तिब्बत और चीन तक हिंदुस्तान की सरहद रेखा खींच डाली थी इसका वृहत वर्णन सुप्रिसद्ध पंडित कल्हण ने अपनी पुस्तक 'राजतरंगिणी' में किया है कश्मीर के इतिहास पर आधारित पुस्तक छाछ-नामा की माने तो कश्मीर के राजा के शौर्य के समक्ष न केवल संपूर्ण हिंदुस्तान के राजे-रजवाड़े नत-मस्तक थे वरन कश्मीर का अधिपत्य हिंदुस्तान के बाहर काबुल से लेकर अरब तक था आज कश्मीर की अवस्था देख दुःख होता है- यह सोच कर कि यह आज खुद अपनी सुरक्षा में नाकामयाब है देश की सुरक्षा का यह अभेध दीवार कश्मीर आज छलनी-छलनी है इस अभेद दीवार पर नित्य हमले होते हैं और हम मूक देखते हैं यह निश्चय की दुर्भाग्यपूर्ण है

आज मैं श्रीनगर के प्रसिद्द लाल चौक में घूम रहा हूँ कदम-कदम पर हिंदुस्तान की सेना के जांबाज़ जवान गश्त लगा रहे हैं इस ताज की सुरक्षा बनाये रखने के लिए जाने कब इस सूबे के अवाम में यह समझदारी आएगी और वे फिरकापरस्त नेताओं के साये से बाहर आयेगें मैं दफ्तर के अपने सहयोगी फ़याज़ के साथ आज श्रीनगर के लाल चौक में हूँयहाँ हमें जम्मू एन्ड कश्मीर बैंक के ऑफिस में काम हैबैंक के कार्यालय में प्रवेश करने पर मैं वहां अधिकारियों को देख कर हैरान रह जाता हूँपूरा बैंक महिला अधिकारियों के हवाले है, केवल सुरक्षाकर्मी और दफ्तरी को छोड़ करआम आदमी के जेहन में रूढ़िगत मुस्लिम समाज की जो परिकल्पना है वह ध्वस्त हो जाती हैकाम के प्रति इन महिला कर्मियों की तत्परता भी काबिल-ऐ-तारीफ़ हैयही हाल स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में भी है जहां हर अधिकारी और क्लर्क महिला ही हैंफ़याज़ मेरे चेहरे पर फैले मनोभावों को देख मुस्करा कर रह जाता हैकाम ख़त्म कर हम बाहर आ जाते हैंमुझे मेरी बेटी के लिए मेवे लेने हैंहमारा ड्राइवर मुश्ताक़ अहमद हमें एक दूकान पर ले जाता हैदिल्ली से साथ आये मेरे सहयोगी यह जानने को इच्छुक है कि क्या एयर इंडिया अखरोट केबिन बैगेज में ले जाने की अनुमति देगादूकान वाला बोल पड़ता है "यहाँ हर सामान लगेज में ले जाया जाता हैआपके इंडिया के कानून यहां नहीं चलते" एक बार फिर अपने देस में 'आपका इंडिया' सुन अजीब लगता है। मैं घंटा घर की घडी पर नज़र डालता हूँघडी गलत समय बता रही हैमैं पास खड़े कश्मीर पुलिस के एक सिपाही का ध्यान इस ओर खींचता हूँ "क्या करें साहब. जब सूबे का समय ही सही नहीं चल रहा हो तो इस घडी में समय दुरुस्त करने से क्या फ़ायदा?” 
मुश्ताक़ हमें बताता है कि लाल-चौक का यह वह घंटा-घर है जहां आये दिन पत्थर-बाज़ी होती रहती हैकदम-कदम पर भारतीय फौज का  सख्त पहरा हैंमुश्ताक़ हमें गाडी से घंटा-घर से उस सकड़ी गली की ओर ले चलता है जहां से हुर्रियत के गुंडे निकल कर पास के घंटा-घर में पत्थर बाज़ी कर वापस दुबक जाते हैंदफ्तर के काम से निपट कर हम इंस्टिट्यूट वापस आ जाते हैंयहाँ से हम बारामुला के लिए चल पड़ते हैं जहाँ संस्थान का कृषि विज्ञानं केंद्र अवस्थित हैबारामुला का नाम बहुत सुना है- हर बार दहशतगर्दों के दहशतगर्दी की वजह से ही सड़क के दोनों और पक्के मकान बने हैं और तक़रीबन हर मकान दो मंजिला है फ़याज़ बताता चलता है शेरे कश्मीर शेख अब्दुल्लाह के आंदोलन "लैंड टू दी टिलर्स" यानि 'जोतने वाला ही ज़मीन का मालिक हो' की सफलता का यह नतीजा है कि आज हर कश्मीरी के पास खेती के लायक ज़मीन और अपना खुद का मकान हैदूर-दूर तक फैले वादियों के नज़ारों ने मन्त्र-मुग्ध कर रखा हैइन वादियों से अभिभूत होकर ही कभी सम्राट अशोक ने धरती के इस स्वर्ग पर श्रीनगर सी मनोरम नगरी बसाया होगापर आज हम खुदा की बक्शी इस अनमोल नेमत की सलामती और शांति बनाये रखने के नाकाबिल हैंयह निश्चय ही दुर्भाग्यपूर्ण हैबस यह दुआ करता हूँ कि खुदा यहां के अवाम को सद्बुद्धि दे और कश्मीर में पुनः अमन चैन बहाल हो

तीसरा दिन: आज हमें वापस लौटना हैकल शाम फ़याज़ देर तक हमारे साथ ही थाउसे अपने घर पुलवामा जाना थालौटते हुए उसे देर हो गयी थीअतः फिक्रमंद हूँआज एयरपोर्ट की ओर जाते हुए उससे संपर्क नहीं बन पा रहा है पता चलता है पुलवामा में कारवाई चल रही है और इंटरनेट बंद हैंमेरे हाथ उसकी सलामती की दुआ में खुद-ब-खुद उठ जाते हैं- खुदा खैर करे और उसकी हिफाजत बनाये रखे। एयरपोर्ट पर सैलानियों और उनके सामानों की बृहत् जांच परख हो रही हैएयरपोर्ट सुरक्षा जम्मू-कश्मीर पुलिस के हवाले हैं न कि सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फाॅर्स केइसका खामियाज़ा यह है कि यहाँ के स्थानीय टूरिस्ट एजेंट अपने-अपने सैलानियों को बिना किसी विशेष जांच परख के अंदर भेजने में सफल हो जाते हैंहमारे सामानों की भी जांच होती है और 'हमारे हिंदुस्तान' की ही तरह यहां भी हमें अखरोट हैंड लगेज में ले जाने की अनुमति मिल जाती हैपर उससे पहले वेब चेक इन को लेकर हमें अच्छा खासा बवाल का सामना करना पड़ाकश्मीर पुलिस को शायद आज भी इसका इल्म नहीं है कि हैंड बैगेज वाले यात्री वेब चेक इन कर बोर्डिंग पास से सिक्योरिटी चेक कर सकते हैंबहरहाल हर कदम पर एयरलाइन वालों को और पुलिस को वेब चेक इन प्रक्रिया को समझा  हम ओर मेरे सहयोगी अंततः चेक करने में सफल होते हैं  
दिल्ली लौटने के दूसरे दिन ही उससे संपर्क बन पाता हैफ़याज़ सकुशल हैमैं राहत की सांस लेता हूँ और पुनः अपने दिनचर्या में जुट जाता हूँ    

1 comment:

  1. बहुत अच्छा विवरण sir यादगार टूर था

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