Thursday, 12 August 2021

विपक्ष की फ़्लेक्स बोर्ड वाली राजनीति (12/08/2021)







आज प्रातः सेंट्रल दिल्ली में अवस्थित कार्यालय पहुँचते हुए जंतर-मंतर के पास लगे फ़्लेक्स बोर्ड से काँग्रेस के हल्ला बोल अभियान का पता चला, जो आजकल आंदोलन के लिए चिर-परिचित स्थान है। इस हल्ला बोल का आह्वान काँग्रेस ने दलितों की रक्षा के लिए किया था। सामने मंच था जिसपर एयरकूलर लगे थे ताकि नेताओं का पसीना न बहे। मंच के सामने सड़क पर प्लास्टिक की कुर्सियाँ लगी थी। ऊपर तिरपाल लगा था। 10 बजे से हल्ला बोल का कार्यक्रम था। चारो ओर दिल्ली पुलिस और अर्ध-सैनिक बल की टुकड़ियाँ तैनात थी। साथ ही डीटीसी की दर्जनों बसें थीं जो आंदोलनकारियों को ले जाने के लिए वहाँ पर रखी गयी थी। ठीक दस बजे कार्यक्रम शुरू हुआ और आधे दिन से भी कम समय में ही समाप्त भी हो गया। इस राष्ट्रव्यापी हल्ला बोल की गूंज महज 200 गज़ दूर अवस्थित कार्यालयों तक भी न पहुंची।   

आज काँग्रेस की राजनीति बस इतनी सी तामझाम में ही सिमट कर रह गयी है। बात देशव्यापी आंदोलन की हो रही थी किन्तु फ़्लेक्स बोर्ड का वजूद एक चौराहे बाद ही समाप्त हो गया था- 'शहंशाहे आलम दिल्ली से पालम- की तर्ज़ पर। यह विचित्र विडम्बना है कि ब्रिटिश शासन में वर्षों जेल की सजा काटने वालों के वंशज आज बिना एयर कूलर धरना पर बैठ भी नहीं पाते। काँग्रेस की लोकप्रियता का एक चौराहे तक सिमट जाने की वजह भी यही आरामतलबी है। यह भी हकीकत है कि बरगद सा विशाल इस संगठन की जड़ों को खोदने का काम भी इसके ही नेता ने अपने स्वार्थवश किया- पहले पहल 1969 में और फिर 1980 में जब पार्टी के दो फाड़ कर दिये गए। इसी का परिणाम है कि आज काँग्रेस मृतप्रायः है। कालांतर में यदि यह नेपथ्य में चली जाये और गुमनामी के अंधेरे में खो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि आज की पौध तो राजनीति करना तक भूल गयी है- आवाम को जगाना और अपने साथ लाना तो दूर की बात है। आज काँग्रेस की सारी राजनीति फ़्लेक्स बोर्ड तक सिमट कर रह गयी है। फ़्लेक्स बोर्ड वाली राजनीति और ट्विटर के भरोसे काँग्रेस में जान नहीं डाला जा सकता है। कदाचित काँग्रेस ज़मीन से कट चुकी है। यह पुनः बैठकखाने वाली काँग्रेस रह गयी है जैसा गांधीजी के आने से पहले इसका चरित्र रहा था। देश हित में एवं प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था में सशक्त विपक्ष का महत्वपूर्ण रोल होता है- काँग्रेस से इतनी उम्मीद तो जनमानस कर ही सकता है। अफसोस काँग्रेस इस रोल में भी असफल सिद्ध हो रही है, जैसा आज के इस धरना में दिखा। 

 

 

 

No comments:

Post a Comment